Mahatma Gandhi G Essay :-
हेलो दोस्तों आज के इस Article में मैं आपको बताऊंगा की Mahatma Gandhi के बारे मैं तो आज हम आपको इसमें आपको उसका पूरा मतलब समजाया जायेगा वह भी हिन्दी में तो यह Post आपके लिए है तो चलिए हम आपको इसके बारे में बताते है आज मैं आप सभी को एक निबंध बताने जा रहा हूं जी हां फ्रेंड आज हम लोग जो सिखेंगे बो निबन्ध है
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी आज हम लोग महात्मा गांधी के बारे में जानेंगे कि इसका जो जीवन रहा वह कैसा रहा उन्होंने कौन-कौन से आंदोलन में भाग लिए उनकी मृत्यु कैसे हुई देश की आजादी में उनकी क्या भूमिका रही इस विषय पर आज हम लोग जानेंगे तो फ्रेंड यदि महात्मा गांधी के बारे में अच्छे ढंग से आप समझना चाहते हैं
तो इस Article को आप पूरा पढ़िए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करते थे सत्य और अहिंसा के के मार्ग पर जाने के लिए तो दोस्तों चलिए जानते हैं इस Article के द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बारे मैं हम इस Article के द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का परिचय, उनके कार्य, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आंदोलन, व उनकी मृत्यु के बारे में जानने का प्रयास करते हैं
परिचय :-
भारत ऋषियों मुनियों और महात्माओं का देश हैं विकट एवं संकट काल से देश को उबारने में ऐसे ही महापुरुषों का योगदान रहा है भारत मां को पराधीनता की वीडियो से छुड़ाने के लिए महात्मा गांधी का जन्म हुआ इन्होंने सत्य एवं अहिंसा के बलबूते महान समाजवादी ब्रिटिश शासन से भारत को मुक्ति दिलाई महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 ईसवी में गुजरात के पोरबंदर नामक स्थान में हुआ था
इनकी माता का नाम पुतलीबाई और पिता का नाम करमचंद गांधी था गांधी जी के माता धार्मिक स्वभाव की थी बचपन में गांधीजी श्रवण कुमार और राजा हरिश्चंद्र की कहानी से बहुत प्रभावित थे 13 वर्ष की उम्र में महात्मा गांधी का कस्तूरबा गांधी से शादी हो गई थी उन्होंने अपनी शिक्षा पोरबंदर राजकोट तथा भावनगर में प्राप्त की वकालत की पढ़ाई करने के लिए गांधीजी इंग्लैंड गए थे गांधीजी की प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही संपन्न हुई
इन्होंने राजकोट से हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण की बात में विलायत से वेस्ट्री की परीक्षा पास की और वकालत पढ़ने के लिए वह बाद में दक्षिण अफ्रीका चले गए सन 1893 ईस्वी में गांधीजी एक कंपनी के मुकदमे की पैरवी करने के लिए दक्षिण अफ्रीका में एक वकील के रूप में गए उन्होंने वहां के काले कानूनों के विरुद्ध सत्याग्रह किया जिसमें उन्हें सफलता भी मिली
सन 1916 ईस्वी में गांधीजी स्वदेश लौटे उन दिनों गोपाल कृष्ण गोखले कांग्रेश के गणमान्य सदस्य थे उनकी अपील पर गांधी जी कांग्रेस में शामिल हो गए जी हां दोस्तों सन 1916 में महात्मा गांधी गोपाल कृष्ण गोखले के कहने पर वह कांग्रेस की पार्टी में शामिल हो गए |
महात्मा गांधी का प्रथम आंदोलन :-
1920 में उन्होंने आंदोलन प्रारंभ किया जिसमें भारत के प्रत्येक नागरिक ने पृथक के रूप से अपना समर्थन दिया 1929 ईस्वी में गांधी जी ने रावी नदी के किनारे कांग्रेस के अधिवेशन पूर्ण स्वतंत्रता की घोषणा कर दी 1930 ईस्वी में इन्होंने नमक कानून के वृद्ध दांडी यात्रा प्रारंभ की 1942 ईस्वी में गांधी जी ने भारत छोड़ो आंदोलन चलाया
जिसमें गांधी जी के प्रयासों से ब्रिटिश शासक देश को स्वतंत्र करने को राजी हो गए 15 अगस्त 1947 ईस्वी को भारत स्वतंत्र हो गया जी हां दोस्तों भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महात्मा गांधी की एंट्री 1920 ईस्वी में हुई और 1920 ईस्वी में उन्होंने असहयोग आंदोलन छेड़ा 1893 में महात्मा गांधी साउथ अफ्रीका चले गए और वहां पर उन्होंने वकील का पैसा अपना लिया 7 जून 1893 को महात्मा गांधी साउथ अफ्रीका रेलगाड़ी से डरबन से प्रिटोरिया जा रहे थे गांधीजी टिकट लेकर प्रथम श्रेणी के डब्बे में बैठे हुए थे
पीटर ने रेलवे स्टेशन पर डब्बे से महात्मा गांधी को रेलवे कंडक्टर द्वारा धक्के मार कर बाहर गिरा दिया गया उनसे कहा गया की प्रथम श्रेणी का डिब्बा सिर्फ गोरे लोगों के लिए है कोई भी अश्वेत इसमें नहीं बैठ सकता इस बात का गांधीजी के मन पर बहुत ही गहरा प्रभाव पड़ा जिसने उनका पूरा जीवन बदल कर रख दिया साउथ अफ्रीका में भारतीय तथा दूसरे अश्वेत लोगों से बहुत ही भेदभाव होता था
उनको वोट देने का अधिकार नहीं था फुटपाथ पर नहीं चल सकते थे ऐसे बहुत सारे प्रतिबंध थे गांधीजी ने इन सभी बातों का विरोध करना शुरू किया गांधीजी अहिंसक विरोध करते थे उनके साथ बहुत सारे लोग इकट्ठे होते गए और बहुत सारे मुद्दों पर साउथ अफ्रीका की अंग्रेजी सरकार को उनकी बात माननी पड़ी
महात्मा गांधी ने1894 मैं साउथ अफ्रीका में एक संगठन बनाया जिसका नाम नटाल इंडियन कांग्रेस था और टॉलस्टॉय फार्म नाम से आश्रम की स्थापना की गांधीजी अपने अहिंसक विरोध और सत्याग्रह के लिए साउथ अफ्रीका में प्रसिद्ध हो चुके थे
महात्मा गांधी के कार्य :-
21 वर्ष साउथ अफ्रीका में बिताने के बाद 1915 में वह भारत वापस आ गए गोपाल कृष्ण गोखले महात्मा गांधी जी को अपना राजनीतिक गुरु मानते थे महात्मा गांधी को अंग्रेजों से भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति के संघर्ष के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़ने को कहा और भारतीयों के अनेकों समस्याओं के बारे में अवगत कराया 1917 में बिहार के चंपारण क्षेत्र में अंग्रेज किसानों से जबरदस्ती नील की खेती करवाते थे
किसानों को कोई लाभ नहीं होता था किसान बहुत दुखी थे उन्होंने महात्मा गांधी से सहायता के लिए प्रार्थना की महात्मा गांधी किसानों के साथ मिलकर अंग्रेजों से अहिंसक विरोध किया अंग्रेजों को नील की खेती करवाना बंद करना पड़ा
जब महात्मा गांधी का भारत में पहला आंदोलन था जिसे हम चंपारण सत्याग्रह के नाम से जानते हैं गांधी जी द्वारा चलाए गए आंदोलन हैं खेड़ा सत्याग्रह, असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन, दांडी मार्च जिससे हम नमक सत्याग्रह के नाम से भी जानते हैं
और भारत छोड़ो आंदोलन, जिसमें गांधी जी ने करो या मरो का नारा दिया जनमानस में अपने व्यक्तित्व के प्रभाव के कारण महात्मा गांधी को अपने सभी आंदोलन में लोगों का भरपूर सहयोग मिला जिस कारण अंग्रेजों को महात्मा गांधी की बातों को सुनना पड़ता था और मानना भी पड़ता था
भारत को अंग्रेजों में स्वतंत्रता दिलाने में महात्मा गांधी का अमूल्य योगदान रहा 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हो गया लेकिन मुस्लिम नेताओं द्वारा मुसलमान लोगों के लिए अलग देश पाकिस्तान की मांग इतनी जोरदार हो गई थी
कि महात्मा गांधी के ना चाहते हुए भी भारत के दो टुकड़े हो गए और एक नया देश पाकिस्तान बन गया उसी समय हिंदू-मुस्लिम लोगों के बीच दंगा हो रहा था गांधीजी मानवता के पुजारी थे स्वतंत्रता के लिए महात्मा गांधी ने अपना पूरा जीवन लगा दिया
15 अगस्त 1947 को भारत का अंग्रेजों में स्वतंत्र होने पर उन्होंने किसी प्रकार के जश्न में हिस्सा नहीं लिया गांधीजी कोलकाता में थे जहां पर में हिंदू और मुस्लिमों के बीच दंगे को शांत करने में लगे हुए थे
महात्मा गांधी जी की मृत्यु :-
30 जनवरी 1948 ईस्वी को नाथूराम गोडसे ने एक प्रार्थना सभा में गोली मारकर गांधीजी की हत्या कर दी उनके अचानक निधन से सारा देश सुख के सागर में डूब गया महात्मा गांधी जो कि हमेशा सत्य और अहिंसा के पुजारी रहे इस प्रकार पूरे संसार को सत्याग्रह अहिंसा का रास्ता दिखाने वाला मसीया इस दुनिया से सदा सदा के लिए अलविदा हो गए महात्मा गांधी की समाधि स्थल राजघाट नई दिल्ली में है
गांधीजी भले ही आज हमारे बीच नहीं हो किंतु उनके विचार प्रासंगिक हैं तथा पूरी दुनिया को रास्ता दिखाते हैं आज गांधी दिवस 2 अक्टूबर को पूरे विश्व में अहिंसा दिवस के रूप में तथा भारत में गांधी जयंती के रूप में मनाया जाता है तथा इस दिन को राष्ट्रीय त्योहार की मान्यता प्राप्त है
Conclusion :-
दुनिया के प्रमुख गांधी जी के जीवन से प्रभावित रहे हैं अमेरिका के मार्टिन लूथर किंग जूनियर, बराक ओबामा, दक्षिण अफ्रीका के नेलसन मंडेला, सभी ने कहा कि उन्होंने गांधी के जीवन से बहुत कुछ सीखा है दुनिया के महान वैज्ञानिक आइंस्टीन ने महात्मा गांधी के बारे में कहा था
आने वाली नस्लें शायद मुश्किल से विश्वास करेंगी ईमान से बना हुआ कोई ऐसा व्यक्ति भी धरती पर चलता फिरता था गांधी जी ने अपने जीवन काल में बहुत सी किताबें लिखी और पत्र-पत्रिकाओं का संपादन किया उनके द्वारा लिखित प्रमुख किताबें हैं
हिंद स्वराज दक्षिण, अफ्रीका में सत्याग्रह का इतिहास, सत्य एक प्रयोग -आत्मकथा, समाचार पत्र पत्रिकाएं जिनका गांधी जी ने संपादन किया वह इंडियन ओपिनियन यंग इंडिया तथा हरिजन |
तो दोस्तों हम आशा करते हैं कि आपको आज का हमारा यह विषय Mahatma Gandhi बहुत अच्छा लगा होगा उम्मीद करता हूँ कि आप सभी को हमारा यह post जरूर पसंद आया होगा और अगर आप सभी को हमारा यह post पसंद आया है
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